मेरे सपने बड़े,
ख्वाहिशें लंबी;
ख्वाब पहाड़ जैसे।
हो जाना चाहता हूं मैं
नीले अंबर-सा असीम,
सागर-सा गहरा।
यह जरूरी नहीं
कि मैं किसी भव्य निर्माण का
शिखर ही बन जाऊं,
पर उसकी बुनियाद में
एक पत्थर की हैसियत भी मिल जाए
तों भी अतिशय गौरव की बात होगी।
यह भी जरूरी नहीं
कि मैं किसी का आदर्श ही बन जाऊं;
पर मेरे दो मीठे बोल किसी दुःखी मन में खुशी के फूल खिला दें;
किसी को ढाढस बंधा दे।
मेरे हौसला आफजाई से कोई आगे बढ़ सके।
तो मेरा जीना सार्थक हो जाएगा,
मैं धन्य हो जाउंगा।
- किशोरी लाल वर्मा