उम्मीद अभी जिंदा है।
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दिल ख्वाहिशों की गठरी है।
मन अरमानों का पुलिंदा है।
कुछ तो बेहतर होगा
यह उम्मीद अभी जिंदा है।।
माना कि गहरा तम है
और उजियारा कम है।
हर दिल है गमजदा
और आंखें भी नम हैं।।
मायूसी में भी आस जगाता
कोई तो बंदा है।
कभी तो बेहतर होगा
यह उम्मीद अभी जिंदा है।।
जिम्मेदारियां न हुईं पूरी।
हसरतें भी रह गईं अधूरी।
लाख दर्द छुपाकर
लबों पे मुस्कान जरूरी।।
अपनी नाकामी पर
यह जन शर्मिंदा है।
कभी तो बेहतर होगा
यह उम्मीद अभी जिंदा है।।
सच-झूठ के पैमाने बदल गये।
सफलता के माने बदल गये।
कुछ तो जानबूझकर
कुछ अनजाने बदल गये।।
मायूसी के आलम में भी
चहक उठता खुशियों का परिंदा है।
कुछ तो बेहतर होगा
यह उम्मीद अभी जिंदा है।।
दिनांक :- 07/02/2019
किशोरीलाल वर्मा 'कुन्दन'
ग्राम - छीपा
राजनांदगांव
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