मंगलवार, 28 अगस्त 2018

मेरा भारत महान।

मेरा भारत महान।
जिसने भी यह नारा दिया वह बहुत ही बड़ी और अच्छी सोच वाला व्यक्ति था। मेरा भारत अर्थात मेरे सपनों का भारत, मेरी उम्मीदों का हिंदुस्तान, मेरे हिस्से का भारत; जिसमें मैं अपने विचारों और कर्मों से गढ़ना चाहता हूं उसे निश्चित रूप से महान होना चाहिए। यह वाक्य एक नागरिक (चाहे आम हो या खास) की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ ही उसके कर्त्तव्यों की ओर भी इंगित करता है। राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान देश की जनता ने महान आदर्शों और आकांक्षाओं से अनुप्राणित होकर आजादी को हासिल करने के लिए घोर कष्ट सहे और बड़े से बड़े त्याग किए। मरण से भी कष्टकारी जेल की यातनाएं सहीं और आत्म बलिदान किए। असंख्य लोगों ने स्वतंत्रता की बलि वेदी पर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दी। महान् त्याग और अपरिमित कष्टों के बाद हमें यह अमूल्य आजादी मिल पायी है इसलिए हर परिस्थिति में इसे सफल बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। आमतौर पर हम अपनी अब तक की उपलब्धियों से असंतुष्ट रहते हैं। लेकिन इसका एक अर्थ यह भी है कि जैसे-जैसे देश प्रगति करते जाता है लोगों की उम्मीदें बढ़ती जाती हैं। आजादी की प्राप्ति के बाद हमारे करोड़ों मजदूरों और किसान भाइयों ने अपना पसीना बहाया है। हजारों वैज्ञानिकों और प्रशासकों ने तथा लाखों बुद्धिजीवियों ने अपना भेजा खपाया है। इसलिए अगर हम यह कह दें कि देश ने इतने वर्षोंं में कुछ भी उन्नति नहीं किया तो उनकी मेहनत का अपमान होगा। लेकिन यह भी सही है कि अनेक कमियां रह गई हैं। जितना होना चाहिए उतना नहीं हो पाया। परन्तु हर किसी पर दोष मढ़ने से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। तमाम कमियों के बावजूद हमारे देश ने काफी तरक्की की है और हम अपने अतीत के साथ-साथ वर्तमान पर भी गर्व कर सकते हैं। हमें अपने देश की मिली-जुली संस्कृति पर अभिमान रहेगा।

जय हिन्द!
जय भारत!!
मेरा भारत महान!!!

बिना मतलब के भी आया कर।

मुझे  परखने में  यूं  न वक्त जाया कर।
बिना मतलब के भी कभी आया कर।।

पूरे जमाने को मालूम है तेरी फितरत,
मुझ से  कुछ  भी  न   छुपाया   कर।

दूसरों की भूल पर हंसने  वाले, कभी
खुद की गलतियों पर मुस्कराया कर।

बड़े नाज़ुक दिल होते हैं कुछ लोग,
जब  जी  चाहे  न आजमाया कर।

मुझे परखने में यूं न वक्त जाया कर।
बिना मतलब के भी कभी आया कर।।

                  - किशोरी लाल वर्मा