बड़ लम्बा तोर इंतजार होगे।
मुहझुलझुल से मोला मुंधियार होगे।।
आहूं-आहूं कहिके आज घला नइ आए।
सम्मार से तोला शुकरार होगे।।
कुंवरबोड़का कहिके भौजी मन कुड़काथे।
तोर अगोरा में जवानी खुआर होगे।।
कोनों ल अतिक भाव मैं देवव नहीं;
फेर दिल तोर बर कइसे बेकरार होगे।।
मया पीरा थोरिकिन नई समझे
बेदर्दी से मो ला कइसे प्यार होगे?
तो ला नइ देखहूं ते जीव छूट जाही;
तोर दरस मोर प्रान के अधार होगे।।
बड़ लम्बा तोर इंतजार होगे।
मुहझुलझुल से मोला मुंधियार होगे।।
किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
03/08/2019
मुरागांव (कोरर), कांकेर।
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