रविवार, 4 अगस्त 2019

मुहझुलझुल से मोला मुंधियार होगे

बड़   लम्बा   तोर    इंतजार     होगे।
मुहझुलझुल से मोला मुंधियार होगे।।

आहूं-आहूं कहिके आज घला नइ आए।
सम्मार   से   तोला   शुकरार   होगे।।

कुंवरबोड़का कहिके भौजी मन कुड़काथे।

तोर अगोरा में जवानी खुआर होगे।।

कोनों  ल  अतिक  भाव मैं देवव  नहीं;
फेर दिल तोर बर कइसे बेकरार होगे।।

मया पीरा थोरिकिन नई समझे

बेदर्दी से मो ला कइसे प्यार होगे?

तो ला नइ देखहूं ते जीव छूट जाही;

तोर दरस मोर प्रान के अधार होगे।।

बड़   लम्बा   तोर    इंतजार     होगे।
मुहझुलझुल से मोला मुंधियार होगे।।

          किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
               03/08/2019
           मुरागांव (कोरर), कांकेर।

© सर्वाधिकार सुरक्षित।

गरीब के दरद

नून नइहे, तेल नइहे, पिसान नइहे।
संगी नइहे, साथी नइहे, मितान नइहे।।

दुखे दुख में  कटत हे जिनगी,
करम में सुख के बिहान नइहे।
संगी नइहे, साथी नइहे, मितान नइहे।।

काम नइहे, धाम नइहे, नाम नइहे।
कहीं कोनो जगह पहचान नइहे।
संगी नइहे, साथी नइहे, मितान नइहे।।

कोनो गरजत हे, कोनो बरजत हे;
जइसे  मोर  कोई  ईमान  नइहे।
संगी नइहे, साथी नइहे, मितान नइहे।।

कभू कोनो भाय नहीं, बने कहाय नहीं।
मोला सहरइया कोनो सियान नइहे।
संगी नइहे,साथी नइहे, मितान नइहे।।

नून नइहे, तेल नइहे, पिसान नइहे।
संगी नइहे, साथी नइहे, मितान नइहे।।

                    - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                            03/08/2019
                        मुरागांव (कोरर), कांकेर

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