बुधवार, 12 जून 2019

पड़ चुका हूं ऐसे-ऐसों के चक्कर में

पड़ चुका हूं ऐसे-ऐसों के चक्कर में।
कुत्ते गधे भी नहीं ठहरते जिनकी टक्कर में।।

अपनी तारीफ़ खुद करके बनते हैं मियां मिट्ठू।
पीठ पर लादे फिरते हैं जलनखोरी के पिट्ठू।।

औरों की क्षमता से जलते रहते हैं रात-दिन।
बद-तमीजी की रायफल पर चढ़ाए रहते कमीनेपन की संगीन।।

जब तब टांग अड़ा कर हासिल कर लेते हैं सरप्राइज।
काली करतूतों की कालिख से करते हैं केमोप्लाइज।।

            -  किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                   पी. टी. एस.,माना
                         2001

©सर्वाधिकार सुरक्षित।

बुधवार, 5 जून 2019

ये जो तेरे चेहरे पे मुस्कान है

ये जो तेरे चेहरे पे मुस्कान है।
मेरी खुशनसीबी की पहचान है।।

तेरी एक मुस्कराहट पर 
हजारों खुशियां कुर्बान हैं।।

तू ही मेरी दौलत है
तुझ पर ही गुमान है।।

तुम्हीं से रौशन मेरी दुनिया
तू ही मेरी जान है।।

अब उतर मेरे कंधे से
देखना तुझे सारा जहान है।।

दुनिया छोटी है और तेरा कद ऊंचा
ये साबित करना मेरा भी इम्तिहान है।।

ये जो तेरे चेहरे पे मुस्कान है।
मेरी खुशनसीबी की पहचान है।।

                     - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'

04/06/2019
राजनांदगांव
© सर्वाधिकार सुरक्षित

सोमवार, 3 जून 2019

हिस्सेदारी नहीं भागीदारी चाहिए

केवल अधिकारों की हिस्सेदारी नहीं
कर्त्तव्यों में भी भागीदारी होनी चाहिए।
सिर्फ कौम की क्यों सोचें,
वतन के लिए भी जिम्मेदारी होनी चाहिए।।
बड़े कष्टों के बाद मिली है आजादी,
इसे सहेजने की समझदारी होनी चाहिए।।
अपनों से मुहब्बत ही ठीक है यारों
दुश्मनों के लिए दिलों में चिन्गारी होनी चाहिए।।
वतन पर मर मिटने वालों की जज़्बात समझ सकें
इतनी सी तो दिलदारी होनी चाहिए।।
केवल अधिकारों की हिस्सेदारी नहीं
कर्त्तव्यों में भी भागीदारी होनी चाहिए।।

                      - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'

दिनांक 03/06/2019
राजनांदगांव
©सर्वाधिकार सुरक्षित