बुधवार, 12 जून 2019

पड़ चुका हूं ऐसे-ऐसों के चक्कर में

पड़ चुका हूं ऐसे-ऐसों के चक्कर में।
कुत्ते गधे भी नहीं ठहरते जिनकी टक्कर में।।

अपनी तारीफ़ खुद करके बनते हैं मियां मिट्ठू।
पीठ पर लादे फिरते हैं जलनखोरी के पिट्ठू।।

औरों की क्षमता से जलते रहते हैं रात-दिन।
बद-तमीजी की रायफल पर चढ़ाए रहते कमीनेपन की संगीन।।

जब तब टांग अड़ा कर हासिल कर लेते हैं सरप्राइज।
काली करतूतों की कालिख से करते हैं केमोप्लाइज।।

            -  किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                   पी. टी. एस.,माना
                         2001

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