गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

जिसके लिए मैं सारी दुनिया से टकरा गया।

जिसके लिए मैं सारी दुनिया से टकरा गया।
उसे दुश्मनों की कतार में पाकर चकरा गया।

अभी तक पीठ पीछे करता रहा  वार वह,
आखिर आज सामने से पकड़ा गया।

बता देते तो हम यूं ही हार मान लेते,
नाहक वह बारूद बिखरा गया।

बहुत कच्चा था मैं दुनियादारी में,
उसका साथ मेरा तजुर्बा निखरा गया।

जतन से सहेजे थे हमने रिश्तों के मोती,
एक झटके में ही वह सब बिखरा गया।
जिसके लिए मैं सारी दुनिया से टकरा गया।
उसे दुश्मनों की कतार में पाकर चकरा गया।

                - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'

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