आतिशबाजी क्यों दिखाती है इस दिवाने को।
एक तुम ही काफी हो दिलों में आग लगाने को।।
बड़ी कातिलाना है तेरी हंसी,
मुस्करा के ही बरबाद कर जाओगी जमाने को।।
कौन बच पाया सोख अदाओं के जादू से,
हर निगाहें आतुर हैं दिल में तेरे समाने को।।
सुन दिल जलाने वाले,
तुम्हें ही आना होगा मरहम लगाने को।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें