जज़्बात ऐसे उसने जगा दिया। कि मेरे दिल ने मुझसे दगा किया।।
अब तक खुद पर गुरूर था बहुत उसने मुझे उसूलों से डिगा दिया।
तन्हा था मैं खुद से पराया भी। सारे जग का उसने सगा किया।।
उसकी दिल्लगी बहुत रास आई दर्द सारा उसने भगा दिया।।
22/11/18 कुंदनपाल
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