देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।
ऐसे न वक्त जाया कर;
सीधे मुद्दे पर आया कर।
दिल में है वही बताया कर;
नाहक न बातें घुमाया कर।।
खुरदरी बातें भी अच्छी होती हैं;
सपाट न बना छोल-छोल कर।।
देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।
तुम्हारी ये झूठी मुस्कान
नहीं छुपा सकती असली पहचान।
चेहरा कुछ और कहता है
जुदा है तेरी जुबान।।
झूठी तारीफों से बेहतर होगा
कि शिकवा करो दिल खोल कर।
देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
09/12/2018
कुंदनपाल
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