माना कि जिंदगी के अनेक रंग अभी बाकी हैं।
पर वतन के दुश्मनों से जंग अभी बाकी है।
कायदे से टकराते रहे हैं उनसे अब तक
लेकिन निपटने के कुछ ढंग अभी बाकी हैं।
और इम्तिहान न लें हमारे सब्र का
मृत्यु का नृत्य उनके संग अभी बाकी है।
उनके आकाओं को भी जहन्नुम पहुंचाए
वो हुड़दंग अभी बाकी है।।
वतन के दुश्मनों से जंग अभी बाकी है।
माना कि जिंदगी के अनेक रंग अभी बाकी हैं।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
04/12/2018
कुन्दनपाल
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