मैं तो मशगूल था उसके कदमों में कालीन बिछाने में।
आसान शिकार समझकर ले लिया मुझे निशाने में।।
उसकी शान में झुकता रहा मैं और वह लगे रहे मुझे गिराने में।
वक्त अपना जाया किया उसने, तरकस के सब तीर आजमाने में।
उसी से हार कैसे जाता मैं और भी तो हैं दुश्मन जमाने में।
मैं तो मशगूल था उसके कदमों में कालीन बिछाने में।
आसान शिकार समझकर ले लिया मुझे निशाने में।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
05/01/2020
जेल बाड़ी, सुकमा
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