न मैं शोहरत चाहूं, न मुझे होशियारी दे।
मेरे मालिक मुझे वतन की पहरेदारी दे।।
मूंछों पर मैं ताव दूंगा।
दुश्मनों को घाव दूंगा।।
सिर्फ देश के लिए दिल धड़के ऐसी बेकरारी दे।
मेरे मालिक मुझे वतन की पहरेदारी दे।।
हिमालय से मुश्किल रस्ता हो।
सामने चाहे टैंक-दस्ता हो।।
कर्त्तव्य-पथ पर बढ़ने की जिम्मेदारी दे।
मेरे मालिक मुझे वतन की पहरेदारी दे।।
अमन की हिफाजत करूंगा।
आखिरी सांस तक मैं लड़ूंगा।।
देशहित में मर मिटने की मेरी बारी दे।
मेरे मालिक मुझे वतन की पहरेदारी दे।।
न मैं शोहरत चाहूं, न मुझे होशियारी दे।
मेरे मालिक मुझे वतन की पहरेदारी दे।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
26/08/2019
मुरागांव छावनी, जिला-कांकेर
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