कोई कसर नहीं छोड़ी नामुरादों ने।
पर हार नहीं मानी मेरे इरादों ने।।
फाकामस्ती में मशगूल था मैं
पर बुरा मान लिए रईसजादों ने।
फकीरी में भी इतना खुश था
कि दुश्मनी ठान ली शहजादों ने।
तोपों से टकराने का हुनर था
लेकिन घेर लिए मुझे प्यादों ने।
मनचाहे आकार में ढाल न सके मुझे
जवाब दे दिए उनके खरादों ने।
दिलों में उनके जैसे आग ही लग गई
जब हंस कर उन्हें देखे मेरे बुरादों ने।
मेरी शालीन मौत से भी जल-भून गये
जब मेरे लिए आंसू बहाए जल्लादों ने।
कोई कसर नहीं छोड़ी नामुरादों ने।
पर हार नहीं मानी मेरे इरादों ने।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
28/09/2019
नगरी, जिला - धमतरी
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