चाटुकारों की कसम!
छुटभैय्यों की सौगंध!!
मेरा राजनीति से उस तरह का कोई लेना देना नहीं है
जैसा मतलब इसमें बिलबिला रहे कीड़े निकालते हैं।
किसी की हार-जीत से मेरा मतलब है सिर्फ उतना।
एक सामान्य मतदाता का वास्ता रहता है जितना।
वर्ना मेरे खानदान में आज तक किसी ने किसी भी दल के एक भी भौंकने वाले प्राणी को तवज्जो देने की जरूरत ही नहीं समझी।
मैं पूरी तरह गैर राजनैतिक व्यक्ति हूं
मुझे राजनीति से उतनी ही नफरत है
जितना इनको जनता से लगाव है
उस जनता से दिखावे की लगाव
जो सत्ता हासिल करते तक ही इनके लिए जनार्दन होती है।
किसी की जी हुजूरी न करना मेरी निस्संगता की निशानी भी तो हो सकती है
लेकिन
हवा में छोड़े गए हर तीर को खुद पर लेने के आदी लोग इसे अपनी मुखालिफत समझते हैं।
दरअसल इस या उस दल के लिए मेरी कोई प्रतिबद्धता नहीं है।
मेरे लिए वे सब आवश्यक बुराई हैं।
न तो इनके बिना रह सकते
और न इनके साथ रह सकते।
इसलिए हमें चुनना होता है उसे जो तुलनात्मक रूप से कम खराब दिखता है।
आम मतदाता की तरह मुझे भी इनसे कम या ज्यादा मात्रा में घृणा है।
न कभी किसी दल की सदस्यता ली।
न कभी स्वामिभक्ति का पट्टा गले में बांधा ।
न किसी जुलुस में झंडाबरदार था।
न किसी यूनियन सदस्य रहा।
जब मैं खुद के लिए भी गूंगा हूं तो फिर दूसरों की आवाज कैसे बन सकता हूं?
लेकिन मेरी एक कमजोरी है
बस एक यही खता है
कि कभी-कभी मैं अपनी कविता को गालियों से भी सजाता हूं
और फिर उसे जोर से उछालता हूं
जूते की मानिंद।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
11/04/2020
सुकमा
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