शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

नापाक पाकिस्तान

अँगरेजों के कुकृत्यों के फलस्वरूप हिन्दुस्तान के गर्भ में एक नाजायज बच्चा पलने लगा था।पैदा होने के पहले ही उस नापाक का नाम पाकिस्तान रख लिया गया।अँगरेजों ने उसे दुनिया में जल्दी लाने के लिए सीजर द्वारा समय पूर्व पैदा करा दिया।भारत का चीर-फाड़ करके पाकिस्तान को दुनिया में लाया गया। भारत देश दर्द से कराह उठा।उसकी चीख केवल महात्मा गांधी सुन पा रहे थे। बाकी नेता तो हिन्दुस्तान की आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त को ही पाकिस्तान की आजादी को स्वीकार कर लिए थे क्योंकि वे सत्ता में भागीदारी पाने के लिए उतावले थे।
                           पाकिस्तान की मनोदशा में वो तमाम कमियाँ है जो एक 'नाजायज औलाद' और 'प्रीमैच्योर बेबी' में होती हैं। पाकिस्तान भारत को कोसते और भारत के सिर में मूतते हुए पैदा हुआ था और आज भी यही कर रहा है।
                    पाकिस्तान में सियासत के लिए एक ही काबिलियत जरूरी है कि हिन्दुस्तान को कोसना,गाली देना,भारत का विरोध करना।वहाँ सत्ता में टिके रहने के लिए लगातार राग-कश्मीर अलापना बेहद जरूरी है।
                       यह राग पाकिस्तानी अवाम को कितना अच्छा लगता है यह तो मालूम नहीं परंतु वहां की फौज को बहुत हीअच्छा लगता है क्योंकि कि उसे मार खाने की आदत जो हो गयी है।सन् 1948,1965,1971 और 1999 चारो बार भारतीय सेना के सामने (ना)पाकी फौज या तो चित हो गयी या पीठ दिखा के भागी है।
                      मजे की बात है कि हमने उन्हें चार बार नहीं हजारों बार क्षमा किया।परंतु मान लीजिए पाकिस्तान लड़ाई में यदि धोखे से भी एक बार भी जीत गया तो क्या होगा?क्या वे हमें छोड़ देंगे जैसे हमने उन्हें बाइज्जत जाने दिया?नहीं ना।पाकिस्तानी हुक्मरान मुहम्मद गोरी,महमूद गजनवी और औरंगजेब की परंपरा के हिमायती हैं।आप बखूबी समझ सकते हैं कि वैसी स्थित में अंजाम कितना भयंकर होगा।
             चारों बार हमारी जीत हुई फिर भी हमारी जमीन के कुछ हिस्से पर उनका कब्जा है। इसलिए यदि मौका मिलता है तो ऐसा सबक सिखाना जरूरी हो जाता है कि पाकिस्तान अगले हजार साल तक कश्मीर का नाम भूल कर बलूचिस्तान को याद करता रहे।
                        जय हिन्द।
                        जय भारत।।

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