महँगाई का मारा
मुसीबतों से बेचैन।
भाई !
मैं आम आदमी
कॉमन मैन।
चुनाव के वक्त
हर नेता का सगा होता हूँ।
और चुनाव के बाद
मैं ठगा होता हूँ।
सत्ता पर काबिज हैं
वो पकड़ के
मेरी गरीबी का दामन।
भाई!
मैं आदमी हूँ आम
मैन हूँ कॉमन।
ले दे के ला पाता हूँ
बूढ़े बाप की दवाई।
मुश्किल से चलती है
बच्चों की पढ़ाई लिखाई।
बिजली का बिल,
ट्यूशन की फीस।
साल भर से बीवी को दिया नहीं
साड़ी एक पीस।
हर जगह मेरी यही हालात
रायपुर रहूँ या उज्जैन।
भाई !
मैं आम आदमी
कॉमन मैन।
जुलूस और हड़ताल में
पुलिस की लाठी खाने
सबसे आगे खड़ा होता हूँ
और कभी ट्रक के नीचे दबकर मरे
हुए कुत्ते की तरह
सड़क पर पड़ा होता हूँ।
न मेरी मौत का मोल है
न जिन्दगी का दाम।
भाई!
मैं आदमी हूँ आम।
आदमी हूँ आम।।
मुसीबतों से बेचैन।
भाई !
मैं आम आदमी
कॉमन मैन।
चुनाव के वक्त
हर नेता का सगा होता हूँ।
और चुनाव के बाद
मैं ठगा होता हूँ।
सत्ता पर काबिज हैं
वो पकड़ के
मेरी गरीबी का दामन।
भाई!
मैं आदमी हूँ आम
मैन हूँ कॉमन।
ले दे के ला पाता हूँ
बूढ़े बाप की दवाई।
मुश्किल से चलती है
बच्चों की पढ़ाई लिखाई।
बिजली का बिल,
ट्यूशन की फीस।
साल भर से बीवी को दिया नहीं
साड़ी एक पीस।
हर जगह मेरी यही हालात
रायपुर रहूँ या उज्जैन।
भाई !
मैं आम आदमी
कॉमन मैन।
जुलूस और हड़ताल में
पुलिस की लाठी खाने
सबसे आगे खड़ा होता हूँ
और कभी ट्रक के नीचे दबकर मरे
हुए कुत्ते की तरह
सड़क पर पड़ा होता हूँ।
न मेरी मौत का मोल है
न जिन्दगी का दाम।
भाई!
मैं आदमी हूँ आम।
आदमी हूँ आम।।
किशोरी लाल वर्मा

वाह वाह वर्माजी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद।त्रिभुवन।
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
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