K L Verma's blog
मंगलवार, 29 सितंबर 2015
छत्तीसगढ़ी क्षणिका
अब रोवाथे तोर सुरता
कभू तैं हंसास।
तोर सुध म ओ बही!
मोर मन रथे उदास।।
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