मेरी यह रचना
मेरी जीवन-संगिनी को
संपूर्ण आदर और प्रेम से समर्पित है-
संग तेरे मैंने कई बसंत देखे;
जिंदगी की खुशियां अनंत देखे।
सबसे भली और नेक हो तुम,
दुनिया के हमने कई संत देखे।
खूबसूरत है तुम्हारे नेह का बंधन,
जिसके सहारे मैंने दिगंत देखे।
एक मुस्कान ही मिटा देती है हर चुभन,
चाहे हमने कांटे अनंत देखे।
बुनियाद तो तुमने रखी बड़ी ही मजबूत,
लोगों ने महज शिखर दुरंत देखे।
संग तेरे मैंने कई बसंत देखे,
जिंदगी की खुशियां अनंत देखे।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
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