रविवार, 8 अप्रैल 2018

आपातकाल

1971 के लोकसभा चुनाव में"गरीबी हटाओ" का नारा देकर  भारी बहुमत से इंदिराजी जीत गईं। अमेरिका के विरोध के बावजूद इंदिराजी ने पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध का कुशल नेतृत्व करके दुनिया के नक्शे में एक नया देश बना दिया। वे अपने आपको भारत की "साम्राज्ञी" समझने लगी। उनके पास सिद्धार्थ शंकर रे और संजय गांधी के रूप में दो "अतियोग्य" सलाहकार भी थे।
                  परंतु 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से इंदिरा गांधी की नींद उड़ गयी। न्यायालय मे साबित हो गया कि वह गलत तरीकों से रायबरेली का चुनाव जीतीं हैं। परिणाम रद्द करते हुए उन पर छ: वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया।
                उक्त आधार पर इंदिराजी को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं था। परंतु वह  सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत लेने में सफल हो गईं। 25 जून को जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान से विशाल जन सभा में इंदिरा सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
                     सत्ता के मोह में इंदिरा गाँधी ने 26  जून 1975 से आपातकाल की घोषणा कर दी। जिस जनता ने उसकी पार्टी को लोकसभा में 352 सीटें दी उन्हीं पर संविधान का अनुच्छेद 352 थोप दिया। परिणाम ---लोकसभा भंग , मूल अधिकारों का निलंबन,  विरोधी जेल में, जबरन नसबंदी।
                  जनता ने भी बदला ले लिया। 1977के आम चुनाव में  कांग्रेस चारों खाने चित  थी ।यूपी ,बिहार,पंजाब,हरियाणा, दिल्ली,मध्यप्रदेश में उसे एक भी सीट नहीं मिली। ऱायबरेली से खुद इंदिराजी चुनाव हार गईं।

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