महान् क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा।
करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई1896 को जालंधर में हुआ था।उच्च शिक्षा के लिए वे 1911 में अमेरिका पहुँचे।वहीं 1913 में लाला हरदयाल के प्रभाव में आकर क्रांतिकारी बन गए।सानफ्रांसिसको से गदर पत्रिका के पंजाबी संस्करण के संपादक करतार सिंह सराभा थे।अमेरिका में रहने वाले चार हजार भारतीयों का आर्थिक और नैतिक सहयोग सराभा को मिला। एक जहाज में गोला बारूद और बंदूके लेकर वे भारत की ओर प्रस्थान किए ।दुर्भाग्य से जहाज अँगरेजों ने पकड़ लिया परंतु सराभा बच निकले।
रासबिहारी बोस के सहयोग से वह पंजाब में क्रांतिकारी आंदोलन संगठित किया।उनका उद्देश्य 21 मई1915 को पूरे देश के सैनिक छावनी में एक साथ विद्रोह भड़काना था।परंतु इसकी भी भनक अंग्रेजी सरकार को लग गयी।करतार सिंह को काबुल भाग जाने की सलाह देकर रासबिहारी बोस जापान चले गए।
रास्ते में उन्हें लगा कि भागने से अच्छा है कि खुद को गिरफ्तार कराये।वजीराबाद की सैनिक छावनी में जाकर अँगरेजों के खिलाफ सैनिकों को विद्रोह के लिए भड़काने के प्रयास में वे पकड़े गए।
16नवंबर1915 को करतार सिंह सराभा को फांसी दे दी गयी।तब वे 19 साल के थे।जज का कहना था--इस युवक ने अमेरिका से लेकर हिंदुस्तान तक अंग्रेजी सरकार को उलटने का प्रयास किया।इसे जब और जहाँ अवसर मिला,अंग्रेजों को हानि पहुँचाने की कोशिश की।इसकी उम्र बहुत कम है परंतु अँगरेजी सरकार के लिए बहुत ही भयानक है।
रविवार, 8 अप्रैल 2018
करतार सिंह सराभा
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