भूलना कुदरत का एक वरदान है।
बहुत से लोगों को खुद से शिकायत रहती है कि उन्हें चीजें आसानी से याद नहीं होती या वे जल्दी ही भूल जाते हैं। कुछ लोगों के साथ तो दोनों ही बातें हो जाती हैं।
भूलना या विस्मरण क्या है? बार-बार पढ़ने के बाद भी याद नहीं होना भूलना है। पुनर्शिक्षण में उन्नति नहीं होना ही विस्मरण है। दोहराना ही किसी भी बात को याद रखने की पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। आप जितना ही दोहराएंगे याद्दाश्त उतनी ही स्थायी होगी। लेकिन भूलना मनुष्य के लिए कुदरत का बहुत बड़ा वरदान है। बड़ी से बड़ी तकलीफ़, बड़े से बड़े दुःख दर्द को हम या तो भूल जाते हैं या उनकी स्मृति समय के साथ-साथ धूमिल हो जाती है। सोचिए अगर हम किसी भी बात को नहीं भुला पाते तो क्या होगा? दुनिया भर के दुःख और तकलीफ से हम पागल हो जाते। कुदरत का धन्यवाद कि हम अच्छी और सुखद बातों को ज्यादा समय तक याद रख पाते हैं। इसके विपरीत दुखद बातों को धीरे धीरे भूल सकते हैं।
यह तो मानी हुई बात है कि हम मुश्किल से अपनी मानसिक शक्तियों के दशांश का ही इस्तेमाल कर पाते हैं। लेकिन यदि इतने का भी सही उपयोग किया जा सके तो भी चमत्कार माना जाएगा। यहां मैं स्मरण शक्ति बढ़ाने या यह कहना बेहतर होगा कि ज्यादा याद कर सकने के लिए कुछ टिप्स बताता हूं।
आत्मविश्वास
आप अपने मस्तिष्क को जैसा कमांड दोगे वैसा ही होगा। यदि अपने मन को समझा लिए कि आप की याददाश्त औसत से अच्छा है तो मान ही लीजिए कि शत-प्रतिशत ऐसा ही है।
इच्छा शक्ति
इच्छा जितनी ही जबरदस्त होगी हम उतना ही अधिक तथ्य याद कर पाएंगे।
दोहराना
यदि आप दो घण्टे पढ़ते हैं तो उसी में से लगभग एक चौथाई समय अर्थात् आधा घंटा पढ़ें हुए सामग्री को दोहराने में लगा सकते हैं।
किसी याद किए टापिक दोहराने से उसकी स्मृति स्थायी होने लगती है। दोहराने का सूत्र है-
पहला दोहराव तत्काल,
दूसरा दोहराव 24 घंटे के अंदर,
तीसरा दोहराव 7 दिनों के अंदर।
यदि पढ़ाई और दोहराव संचयी हो यानी पहले पढ़े और याद किए हुए को भी याद रखते हुए आगे की पाठ के साथ साथ याद रखें तभी ज्ञान में वृद्धि होगी।
पूर्व ज्ञान
हम जो भी पढ़ें उसे अपने पहले की जानकारी से अंतर्संबंधित करते हुए, पूर्व ज्ञान का संपादन और संशोधन करते हुए पढ़ें।
तुलनात्मक अध्ययन
जैसे मंगल ग्रह के बारे में पढ़ रहे हैं तो उसकी पृथ्वी आदि अन्य ग्रहों से तुलना करते हुए पढ़ सकते हैं। इसी तरह केंद्र सरकार के बारे में पढ़ते समय उसकी तुलना राज्य की कार्यपालिका से की जा सकती है। लेकिन तुलना के लिए पर्याप्त समानता आवश्यक है, बिल्कुल असमान और नितांत भिन्न चीजों में तुलना नहीं कर सकते हैं।
ज्ञान अर्जन के लिए पढ़ाई
परीक्षा के दृष्टिकोण से पढ़ाई हमारे ज्ञान को उथला बना सकती है ।इसलिए पहले सिर्फ ज्ञान बढ़ाने के लिए पढ़ाई किया जा सकता है तभी विषय की सही समझ विकसित होगी। इसके बाद ही परीक्षा विशेष के अनुसार पहले की पढ़ाई का उपयोग किया जाना ज्यादा सही हो सकता है।
प्रारुप में या बिंदुवार अध्ययन
किसी टापिक का एक प्रोफार्मा होता है। सरल शब्दों में कहें तो उस टापिक को हेडिंग्स में बांटकर पढ़ा जाए तो आसानी से याद किया और रखा जा सकता है। अलग-अलग विषयों में अध्ययन के बिंदु भिन्न भिन्न हो सकते हैं लेकिन एक ही प्रकार के टापिक्स के लिए एक जनरल प्रोफार्मा बनाया जा सकता है। जैसे इतिहास में किसी आंदोलन के बारे में पढ़ते समय कुछ सामान बिंदु इस तरह हो सखते हैं,पृष्ठभूमि, जिसमें आंदोलन शुरू हुआ, मुख्य कारण, तात्कालिक कारण, उस आंदोलन के उद्देश्य, प्रमुख नेता, कार्यप्रणाली, फैलाव और विस्तार, प्रभाव, उसका दमन, समाप्ति, सफलता असफलता, पहले के आंदोलन से अंतर आदि। यह प्रारूप इस प्रकार के सभी आंदोलनों के अध्ययन के लिए लागू किया जा सकता है।
शब्दों को महसूस करते हुए पढ़ना
जब किताब में लिखे शब्दों को इस तरह महसूस करते हुए पढ़ा जाए कि वे केवल शब्द और वाक्य नहीं होकर वास्तविक दुनिया के तथ्य हैं, फेनोमेनन है, दृश्यमान जगत का हिस्सा है और आप उसका रंग रूप, आकार प्रकार, स्वाद और गंध और उसकी ऊष्मा को महसूस करते हैं तो आप उसे आसानी से भूलेंगे भी नहीं।
स्वास्थ्य : शारीरिक और मानसिक दोनों बनाए रखना जरूरी है। हल्का व्यायाम या सूर्य नमस्कार जैसे कुछ आसन या टहलना या साइकिलिंग। फिटनेस में कमी पढ़ने के लिए बैठने की क्षमता को कम कर देती है। खाना कम मात्रा में ही खाना ठीक रहता है। ज्यादा खाना खाने से पेट की ओर रक्त संचार ज्यादा बढ़ जाता है तथा मस्तिष्क को खून की सप्लाई में कमी आती है। इससे नींद, सुस्ती और ऊबाऊपन आ सकता है। इसलिए कम खाएं और पढ़ाई के हर स्पेल के बाद फल आदि पूरक आहार अवश्य लें। परीक्षा के दिनों में शरीर में मिनरल्स और विटामिंस की कमी शारीरिक मानसिक क्षमता को कम कर देती है। लेकिन ये सब डाक्टर की सलाह से लें।
सेव फल
यह बहुत ही अच्छा फल है। यह रखने, धो कर साफ़ करने और खाने में आसान है। इसे बिना काटे पढ़ते समय भी खा सकते हैं। याददाश्त और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा फल माना गया है।
एक गिलास पानी
मौसम के अनुसार ठंडा या गुनगुना।
कई बार केवल पानी पीने से थकान मिट जाती है।
एक बैठक (सिटिंग) की अवधि
लोग कहते हैं कि तीन घंटे से अधिक की लगातार पढ़ाई से चीजें दिमाग के ऊपर ऊपर से निकल जाती हैं। हो सकता है कि अधिकतर लोगों के साथ ऐसा हो। लेकिन यह केवल एक सामान्य कथन मात्र है। अलग अलग लोगों के लिए बात अलग है। कुछ व्यक्ति एक घंटे से अधिक लगातार पढ़ाई नहीं कर सकते। ठीक इसी तरह कुछ लोग लगातार तीन घंटे से भी ज्यादा पढ़ सकते हैं। यदि विषय में पूरी रुचि है, मौसम के अनुसार कपड़े हों, पूरी तैयारी से और आवश्यक सामग्री के साथ जो पढ़ाई के दौरान जरूरी है बैठते हैं। आप को डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं हो, आपका सेलफोन बंद हो तो लगातार 3,4,5, और 6 घंटे भी पढ़ सकते हैं। तभी तो औसत आकार का एक उपन्यास लोग एक से तीन दिनों में पढ़ लेते हैं।
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