रविवार, 1 अप्रैल 2018

कृपया कचरा यहां डालें

कृपया कचरा यहां डालें।

सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए कूड़ादानों के ऊपर कुछ इसी तरह लिखा होता है। हमारा पुलिस विभाग एक प्रकार से समाज का कूड़ादान है,जो पूरे समाज की गंदगी समेटकर रखता है। जो भी चोर, उचक्के, बदमाश जिन्हें आप अपने आस-पास भी देखना पसंद नहीं करते वे सब हमारे मत्थे हैं। जेल विभाग के लोग घिनौने अपराधियों के साथ  अपनी आधी जिंदगी गुजारते हैं। जिला पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी 18-20 घंटे समाज का कचरा हटाते हैं। सशस्त्र बल के जवान 24सों घंटे नक्सलियों की मांद में रहते हैं,घर से दूर। हमारा मुख्य उद्देश्य तो परित्राणाय साधूनाम् है लेकिन इसके लिए आजकल दुष्टों का दमन आवश्यक हो गया है। बल्कि अब जब अमन के दुश्मनों की संख्या बहुत बढ़ चुकी है तो फिर उन्हीं से निपटने में ही हम व्यस्त रहते हैं अब आप इसी को सज्जनों का परित्राण मान लीजिए। चूंकि हमें अक्सर घटिया लोगों से निपटना होता है तो उन्हीं के काम करने के तरीकों से ही उन से निपट सकते हैं। हमें समाज को बीमार करने वाले कीटाणुओं और वायरसों से लड़ना है।हम पुलिस के लोग वैक्सिन की तरह हैं। आम लोगों की भाषा में कहूं तो जैसे ज़हर को काटने के लिए जहर का इस्तेमाल किया जाता है; सांप के काटे का वैक्सीन सांप के जहर से ही बनता है। ठीक वैसे ही हमारा पुलिस विभाग है। सही वैक्सीन सही मात्रा में लगने पर लाभ हो सकता है, लेकिन कम मात्रा में लगने से फायदा नहीं होता और ओवरडोज हो गया तो भयंकर नुकसान होगा। तो जनाब इस कम या ओवरडोज में उन बेचारे कमजोर कीटाणुओं का क्या दोष जो वैक्सीन में रहते हैं उन्हें तो अपने निर्धारित​ पैटर्न में ही काम करना है। मैं नि:संकोच स्वीकार करता हूं कि हम में भी बहुत सी कमियां हैं क्योंकि हम किसी दूसरी दुनिया से आए देवदूत नहीं हैं; और न ही पुलिस वाले पेड़ों पर फलते हैं। हम इसी समाज की उपज है , तमाम कमियों और परेशानियों से घिरे आम आदमी हैं हम। हमे किसी बाहरी नजर से नहीं देखें । पुलिस और सशस्त्र बलों को डाकुओं, नक्सलियों और आतंकवादियों जैसे लोकतंत्र विरोधी शक्तियों से लड़ने के लिए बनाया गया है। पुरानी कहावत है कि दुष्ट से दुष्टता से ही लड़ा जा सकता है; शठे शाठ्यम् समाचरेत्। गैर लोकतांत्रिक शक्तियों से लड़ने वाले किसी भी बल या फोर्स के अंदर जरा सा भी लोकतंत्र नहीं होता। पुलिस​और सशस्त्र बलों का प्रत्येक सदस्य चाहे अधिकारी हो या कर्मचारी दोनों ही गुलाम होते हैं, आदेशों के गुलाम। लेकिन यह गुलामी किसी मजबूरी का परिणाम न होकर योग्यता के बल पर अर्जित किया गया है । आप आजाद हैं हम पर कीचड़ उछालने के लिए, आप स्वतंत्र हैं हम पर थूकने के लिए । आपकी किस्मत में आजादी का सुख है जबकि हमें सेवा का सौभाग्य प्राप्त है।
                          जय हिंद।

                   किशोरी लाल वर्मा
                     कंपनी कमांडर
                छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल

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