East or west
India is best.
हमारी विनम्र प्रार्थना है कि भारत के महामानवों की तुलना लेनिन से कदापि नहीं करें। खूनी क्रांति के सूत्रधार लेनिन प्रतिहिंसा का अवतार था। रुसी क्रांति के दौरान विरोधी वर्गों की समाप्ति के नाम पर भयंकर खून खराबा को अंजाम दिया गया जिसमें चिन्हित वर्ग की गर्भवती महिलाओं की कोख फाड़ कर बदला लिया गया। सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हत्याओं का दौर जारी रहा तथा लेनिन और उसके उत्तराधिकारियों के निर्देशन में सामूहिक नरसंहार होते रहे। लेनिन की नीतियों और कार्यों के दुष्परिणामों को पूर्व सोवियत संघ के महान नेता मिखाईल गोर्वाच्योव की पेरोस्त्रोइका (पुनर्गठन) और ग्लासनोस्त(पारदर्शिता) के प्रगतिशील कार्यक्रमों के द्वारा भी दूर नहीं किया जा सका। लेनिन के अपने ही देश में, 80 वर्षों के भीतर उसकी विचारधारा से लोगों का मोहभंग हो गया। इसकी तानाशाही नीतियों से त्रस्त लोगों ने इसकी मूर्तियों को गिरवा दिया।
इसलिए हमारे महापुरुषों की लेनिन से तुलना करके उनका अपमान नहीं करिए। चाहे महाकरुणा का उपदेश देने वाले बुद्ध हो, अहिंसा के आग्रही महात्मा गांधी हो या स्वयं पददलित और शोषित होने के बावजूद समता का संदेश देने वाले अंबेडकर हो, ये सभी क्षमा और त्याग की मूर्ति थे। यहां तक कि सेंट्रल असेंबली में भगतसिंह द्वारा फेंका गया बम किसी को मारने या डराने के लिए न होकर बहरों को सुनाने के लिए था।
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