पकौड़े पर बहस जारी है।
भूख गरीबी के मसलों पर
बिग बॉस की खबर भारी है।
जनता के दुःख-दर्दों से क्या लेना
पकौड़े पर बहस जारी है।।
देश को खंडित करने वालों को
मंडित करने का है रिवाज यहां।
सेना पर भी सियासत करते हैं
पत्थर बाजों के हमराज यहां।।
खून से रंगी हुई आज
केसर की क्यारी है।
जनता के दुःख दर्दों से क्या लेना
पकौड़े पर बहस जारी है।।
मौज में हैं वे
जो नफरत की फसल उगाते हैं।
दुःखी हैं मजदूर-किसान
जो दिन-रात पसीना बहाते हैं।।
खेतों में पसरा सूनापन
उदास-उदास फुलवारी है।
जनता के दुःख दर्दों से क्या लेना
पकौड़े पर बहस जारी है।।
किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
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