शनिवार, 15 सितंबर 2018

हमारी दोस्ती में

हमारी दोस्ती में कुछ लोग बड़े काबिल हो गये।
वे रहम दिल और हम रहम के काबिल हो गये।।

जिनकी आंखों से पोंछे थे हमने आंसू कभी,
वे अब हमीं पर हंसने वालों में शामिल हो गए।

पता ही नहीं चला कि कब लूट लिये गये,
हम दोस्ती में इस कदर गाफिल हो गये।

जिन नाउम्मीदों को हमने दिया पनाह,
आज  वो  ही  हमारे  कातिल  हो  गये।

हमारे जिन लफ़्ज़ों की शान से करते थे नकल,
वे भी उनकी नज़र में अब बातिल हो गये।

(बातिल=व्यर्थ)

हमारी दोस्ती में कुछ लोग बड़े काबिल हो गये।
वे रहम दिल और हम रहम के काबिल हो गये।।

                  - किशोरीलाल वर्मा 'कुन्दन'

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