जो जीता है तुम्हारे लिए उसी की जान लेते हो।
सबको अपने जैसा खुदगर्ज क्यों मान लेते हो?
मुहब्बत से ही लूट लोगे सारी दुनिया,
हर किसी से दुश्मनी क्यों ठान लेते हो?
प्यार-मुहब्बत भी कोई चीज होती है यार,
होशियारी को ही सब कुछ क्यों मान लेते हो?
सहज सरल हैं तुम्हारे सभी अपने लोग,
चालाकी और बांकपन का कहां से ज्ञान लेते हो?
हर दिल ने समेट रखा है दर्द का समंदर
उसे खुशियों का सैलाब क्यों मान लेते हो?
जो जीता है तुम्हारे लिए उसी की जान लेते हो।
सबको अपने जैसा खुदगर्ज क्यों मान लेते हो?
-किशोरीलाल वर्मा 'कुंदन'
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