जब से आया है तेरा पैगाम।
दिल हुआ बेलगाम।
दिन-रात तुम्हें याद करना
इसका बस एक काम।
मन मचलता है
पास तुम्हारे आने को।
दिल है बेकरार
हर खतरा उठाने को।।
भाता नहीं है मुझे
तेरे शिवा कोई नाम।
जब से आया है तेरा पैगाम।
दिल हुआ बेलगाम।।
खींचा चला आता हूं
तेरी ही ओर।
तू ही है
मेरी चाहत की छोर।।
तुझे पाने की जिद में
भूल जाता हूं अंजाम।
जब से आया है तेरा पैगाम।
दिल हुआ बेलगाम।।
जब तुमसे बात हुई।
हसीन मुलाकात हुई ।
दिल की जमीं पर
खुशियों की बरसात हुई।।
दिन मेरे उजले हुए
सुहानी हो गई हर शाम।
जब से आया है तेरा पैगाम।
दिल हुआ बेलगाम।
दिन-रात तुम्हें याद करना
इसका बस एक काम।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
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