बुधवार, 10 जुलाई 2019

ऐ दिल! तूने सपने बड़े-बड़े क्यों पाले हैं?

हम तो छोटी बातों में भी खुश होने वाले हैं।
ऐ दिल! तूने सपने बड़े-बड़े क्यों पाले हैं??

सूरज को यहां लाने की बातें न कर,
मेरे के लिए काफी, दीयों के उजाले हैं।।

पांच-सितारा में खाने की उसको ख्वाहिश कहां?
जिसके नसीब में मां के हाथों के निवाले हैं।।

बड़प्पन का बोझ सहना सबके बस में नहीं।
बुनियाद में दबकर भी कुछ लोग मुस्कराने वाले हैं।।

हम तो छोटी बातों में भी खुश होने वाले हैं।
ऐ दिल! तूने सपने बड़े-बड़े क्यों पाले हैं??

                    - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                            10/07/2019
                               ग्राम - छीपा
                              राजनांदगांव

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