केवल अधिकारों में हिस्सेदारी नहीं
कर्त्तव्यों में भी भागीदारी होनी चाहिए।
सिर्फ कौम की क्यों सोचें,
वतन के लिए भी जिम्मेदारी होनी चाहिए।।
बड़े कष्टों के बाद मिली है आजादी,
इसे सहेजने की समझदारी होनी चाहिए।।
अपनों से मुहब्बत ही ठीक है यारों
दुश्मनों के लिए दिलों में चिन्गारी होनी चाहिए।।
वतन पर मिटने वालों की जज़्बात समझ सकें
इतनी सी तो दिलदारी होनी चाहिए।।
केवल अधिकारों में हिस्सेदारी नहीं
कर्त्तव्यों में भी भागीदारी होनी चाहिए।।
- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
दिनांक 03/06/2019
राजनांदगांव
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