बुधवार, 17 जुलाई 2019

मेघदूत

मेघदूत

मेघदूत संस्कृत में लिखित खंडकाव्य है। महान साहित्यकार कालिदास ने इसकी रचना की है। इसमें कुबेर के दरबार में प्रतिदिन सुबह फुल पहुंचाने वाले माली का कार्य करने वाले किसी यक्ष की कहानी है जो अपने काम में कोई गलती करने के कारण न केवल सेवा से बर्खास्त किया गया था, साथ में उसे देश निकाला भी दे दिया गया था। वह छत्तीसगढ़ के रामगढ़ की पहाड़ी में अपने प्रव्रजन का समय व्यतीत कर रहा था। आषाढ़ मास के प्रथम दिन आकाश में बादलों को देख कर उसे अपनी जीवन संगिनी की स्मृति और गहरी हो जाती है। इसलिए वह बादल के सामने ही अपनी भावनाओं को व्यक्त करने लगता है।मेघ को अपना दूत मानकर अपनी संगिनी के पास ले जाने के लिए संदेश कहता है। मेघदूत में सरगुजा से लेकर हिमालय क्षेत्र तक रामगिरि से लेकर अलकापुरी तक के विभिन्न जनपदों का, वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का, जन-जीवन और विविध संस्कृतियों का जितना सुन्दर विवरण कालिदास ने किया है वैसा शायद किसी ने किया होगा। अगर मध्य भारत और उत्तर भारत के सांस्कृतिक भूगोल को समझना है तो मेघदूत भी पढ़िए। रही बात श्रृंगार रस की तो इसमें भी कालिदास की बराबरी के साहित्यकार बहुत कम है।

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