गुरुवार, 24 जनवरी 2019

मैं तो वही हूं

मैं ही हूं सही
यह बात कभी न कही।
तेरा नजरिया ही बदलता रहा
मैं तो वही हूं, वही।।

हर बात पर सहमत होना जरूरी नहीं।
हां में हां मिलाना मजबूरी नहीं।।
बहस भी तो मुनासिब है कहीं कहीं।
तेरा नजरिया ही बदलता रहा
मैं तो वही हूं, वही।।

माना कि हम सुधर न सके।
तेरी उम्मीदों पर खरा उतर न सके।।
मुझ में मेरा भी तो कुछ होगा
सब कुछ तेरा नहीं।
तेरा नजरिया ही बदलता रहा
मैं तो वही हूं, वही।।

हर दांव पर हम सम्हल न सके।
और वक्त के साथ बदल न सके।।
हालांकि तेरी कोशिश में
कोई कमी न रही।
तेरा नजरिया ही बदलता रहा
मैं तो वही हूं, वही।।

सारी दुनिया से बाखबर।
और खुद से है तू बेखबर।।
कोई तो रखता होगा
तेरी करतूतों का खाता-बही।
तेरा नजरिया ही बदलता रहा
मैं तो वही हूं, वही।।

          -- किशोरी लाल वर्मा'कुन्दन'
                       कुन्दनपाल
                   23/01/2019

© सर्वाधिकार सुरक्षित

रविवार, 23 दिसंबर 2018

कश्मीर आजकल

कश्मीर-आजकल

छत्तीसगढ़ी कविता
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

सुन तो भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।

जेन ल अपन लइका समझ के मूँड़ मँ बोहेन
पड़ोसी ल बाप समझ के मेछरावत हे।
भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।।

जेन सेना के नाम से उँकर कका मन थर्राथे
ओकरे ऊपर पथरा बरसावत हे।
भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।।

माछी समझ के जेन ला नई थपड़ायेन
वो नाक में खुसर के भुनभुनावत हे।
भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।।

छींक परबो ते उँकर का गत हो ही
ये ला ओमन बिसरावत हे।
भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।।

केसर के कियारी ल खून से झन सींचे
नहीं ते उँकरो बारी आवत हे।
बने चेता दे भईया मंगलू!
ए मन अनते तनते जावत हे।।

सुन तो भईया मंगलू!
ए कश्मीर कोन डहन जावत हे।।

       ----किशोरीलाल वर्मा 'कुन्दन'।

रविवार, 9 दिसंबर 2018

जब से उनका इजहार आया है

जब से उनका इजहार आया है।
चेहरे पर मेरे निखार आया है।।

खिल-खिल गई हूं मैं, जैसे
पतझड़ में बहार आया है।

मुद्दतों से जिसकी तलाश थी
आज वो दिलदार आया है।

धड़कनों ने  पुकारा था जिसे
नजरों में पहली बार आया है।

मिलेंगे तो जाने न दूंगी
यह खयाल सौ-सौ बार आया है।

जब से उनका इजहार आया है।
चेहरे पर मेरे निखार आया है।।

           -- किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                   03/12/2018
                      कुन्दनपाल

© सर्वाधिकार सुरक्षित

जंग अभी बाकी है

माना कि जिंदगी के अनेक रंग अभी बाकी हैं।
पर वतन के दुश्मनों से जंग अभी बाकी है।

कायदे से टकराते रहे हैं उनसे अब तक
लेकिन निपटने के कुछ ढंग अभी बाकी हैं।

और इम्तिहान न लें हमारे सब्र का
मृत्यु का नृत्य उनके संग अभी बाकी है।

उनके आकाओं को भी जहन्नुम पहुंचाए
वो हुड़दंग अभी बाकी है।।

वतन के दुश्मनों से जंग अभी बाकी है।
माना कि जिंदगी के अनेक रंग अभी बाकी हैं।

                   - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                         04/12/2018
                            कुन्दनपाल

© सर्वाधिकार सुरक्षित।

बातें न गोल-गोल कर

देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।

ऐसे न वक्त जाया कर;
सीधे मुद्दे पर आया कर।
दिल में है वही बताया कर;
नाहक न बातें घुमाया कर।।
खुरदरी बातें भी अच्छी होती हैं;
सपाट न बना छोल-छोल कर।।
देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।

तुम्हारी ये झूठी मुस्कान
नहीं छुपा सकती असली पहचान।
चेहरा कुछ और कहता है
जुदा है तेरी जुबान।।
झूठी तारीफों से बेहतर होगा
कि शिकवा करो दिल खोल कर।
देख तू सीधे-सीधे बोल कर।
यूं न बातें गोल-गोल कर।।

                 - किशोरी लाल वर्मा 'कुन्दन'
                         09/12/2018
                             कुंदनपाल

© सर्वाधिकार सुरक्षित।

बुधवार, 21 नवंबर 2018

जज़्बात ऐसे उसने जगा दिया।
कि मेरे दिल ने मुझसे दगा किया।।

अब तक खुद पर गुरूर था बहुत
उसने मुझे उसूलों से डिगा दिया।

तन्हा था मैं खुद से पराया भी।
सारे जग का उसने सगा किया।।

उसकी दिल्लगी बहुत रास आई
दर्द सारा उसने भगा दिया।।

22/11/18
कुंदनपाल

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

तुम्हारे लिए ही जो सांस लेता है।

तुम्हारे लिए ही जो सांस लेता है।
उसी मुहब्बत का हिसाब लेता है।।

नाहक ना परेशान कर उसे
जो तुम्हें मीठे ख्वाब देता है।

गुणा-भाग से परे होती हैं कुछ बातें
वक्त ही इनका हिसाब देता है।

मुश्किलों को करता है जो आसान
उसी का तू जवाब लेता है।

तुम्हारे लिए ही जो सांस लेता है।
उसी मुहब्बत का हिसाब लेता है।।